आप इंसान तो हो नहीं सकतीँ
मेरे तजुर्बे के हिसाब से तो बिलकुल भी नहीं
क्यूंकि इंसान होने के लिए जो ज़रूरी ऐब हैं
वो तो आप में हैं ही नहीं.
आप फरिश्ता भी नहीं हो सकतीं
क्यूंकि उसके लिए तो ख़ुदा के बड़े करीब होना पड़ता है
और मैं, कम से कम अपनी सोच में तो, आपको बाँट नहीं सकता
आप का होना शायद सिर्फ मुक़ाम-ए-मोहब्बत ही हो सकता है
जहां आप सिर्फ वो ना पा सकने वाली मंज़िल हो सकती हैं
जिसकी कोशिश में बस होना होता है, पहुचना नहीं
मेरे तजुर्बे के हिसाब से तो बिलकुल भी नहीं
क्यूंकि इंसान होने के लिए जो ज़रूरी ऐब हैं
वो तो आप में हैं ही नहीं.
आप फरिश्ता भी नहीं हो सकतीं
क्यूंकि उसके लिए तो ख़ुदा के बड़े करीब होना पड़ता है
और मैं, कम से कम अपनी सोच में तो, आपको बाँट नहीं सकता
आप का होना शायद सिर्फ मुक़ाम-ए-मोहब्बत ही हो सकता है
जहां आप सिर्फ वो ना पा सकने वाली मंज़िल हो सकती हैं
जिसकी कोशिश में बस होना होता है, पहुचना नहीं
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